रजोनिवृत्ति समस्या और समाधान ( Menopose-problems,solution-hindi)

मेनोपॉज यानि की रजोनिवृति क्या हैै?

Menopose problems solution hindi – मेनोपॉज यानिकी रजोनिवृति स्त्रियों में होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है,जिसमे स्त्रियों में हर महीने नियमित आने वाली महावारी धीरे धीरे अनियमित होते जाती है और लगातार एक साल तक जब महावारी नही आती तो उसे स्त्री का मेनोपोज यानी कि रजोनिवृति कहते है।आइए देखते है रजोनिवृत्ति के दौरान होने वाली समस्या और उसका समाधान

कब होती है रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज)
भारत मे स्त्रियों की मोनोपॉज की उम्र लगभग 48 से 50 साल,की है।अगर स्त्री 40 साल के पहले मेनोपोज़ में आती है तो उसे प्री मैच्योर मेनोपॉज कहते है और 40 के बाद अर्ली मेनोपॉज कहते है।

रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के कारण और लक्षण:- Menopose problems solution hindi

स्त्री की ओवरीज का काम है एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन का उत्पादन करना और ये एस्ट्रोजन ओवरीज में अंडो का मेच्योरेशन और ओवेलुशन को कंट्रोल करता है। त्वचा को लचीली रखता है,लेकिन जैसे महिला की उम्र 35 से ऊपर हो जाती है तो महिला में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का उत्पादन कम होने लगता है,और जब महिला 45 की उम्र को पार करती है तो वो नोटिस करती है की उसका मेच्योरेशन यानी कि महावारी की फ्रीक्वेंसी कम हो गयी है या ज्यादा हो गयी है,ब्लीडिंग कम हो रही है या बहुत ज्यादा हो रही है।और 50 कि उम्र आते आते उनका मेनोपोज़ हो चुका होता है,और उनकी ओवरीज में अंडो का बनना बंध हो चुका होता है।जिससे अब उन्हें पीरियड्स नही आएंगे और न ही वो गर्भवती होगी।

मेनोपॉज का दौर हर महिला के लिए अलग अलग हो सकता है,किसी किसी में 6 महीने से लेकर एक या दो साल तक भी ये दौर चलता है।

मेनोपॉज के दौरान स्त्री के ओवेरीज़ में बनने वाला एस्ट्रोजन होरमोंस का बनना कम होते जाता है जिसकी वजह से स्त्रीओं शारीरिक के साथ मानसिक बदलाव आता है और जिससे उनको शारीरिक और मानसिक समश्याओ से गुजरना पडता है।हालांकि सभी महिला को शारीरिक या मानसिक समश्या एक सी नही होती। किसी किसी को थोड़ी बहोत समश्या होती है और कुछ ही समय में अपने आप सब ठीक हो जाता है,लेकिन किसी किसी महिलाओं को काफी शारीरिक और मानसिक तकलीफ से गुजरना पड़ता है।

रजोनिवृत्ति में होने वाली शारीरिक और मानसिक समश्या

शारीरिक समस्या:-
1)महावारी का अनियमित होना सबसे पहली निशानी है।
कभी अल्प स्त्राव होता है,तो कभी कभी रक्त का स्त्राव ज्यादा होता है।इसकी फ्रीक्वेंसी भी इररेगुलर होती है।
2)हॉट फ्लशेस जो कुछ सेकण्ड्स से लेकर कुछ मिनट तक रहता है जिसमे अचानक गरमी लगने लगती है पसीना पसीना होनेलगता है और कुछ ही देर मेंअचानक से सब ठीक हो जाता है।
2)वजन का बढ़ना

3)स्नायुओं में अकड़न होनी,और जोडों में दर्द होना।
4)धड़कन का अचानक बढ़ना।

5)सर में दर्द होना
6)स्तन में भारी पन होना
7)त्वचा का सेंसिटिव हो जाना
8)बालो का झड़ना ओर पतले हो जाना
9)योनि में कुदरती ल्युब्रिकेशन की कमी होना,ड्रायनेस का होना जिससे यूरिनरी इंफेक्शन होने की संभावना बढ जाती है।
जिससे यूरिन पे कंट्रोल छूटजाता है कभी भी यूरिन लीक होने लगता है।
10) यूटरस प्रोलैप्स होना जिसमे गर्भाशय का नीचे की और खिसकना ..वजाइएनल ड्राईनेस की वजह से सेक्सयूल इंटरकोर्स पीड़ादायक हो जाता है।जिससे सेक्स की इच्छा कम हो जाती है।
11)हॉर्मोन्स में एस्ट्रोजन की कमी से त्वचा का पतला और ड्राई होना
जिसकी वजह से चहेरे पेर झुर्रियों का होना और एजिंग प्रोसेस का फ़ास्ट होना
12)बच्चे के जन्म देने की क्षमता खतम हो जाती है।

रजोनिवृत्ति समस्या और समाधान ( Menopose-problems,solution-hindi)
मेनोपॉज के दौरान एक्सरसाइज की आवश्यकता


मानसिक समस्या


1)मूड स्विंग:जिसमे मनोदशा में बदलाव देखा जा सकता है, चीड़ चिड़ा पन होना

जैसे अचानक किसी पे गुस्सा आ जाता है।अचानक पछतावा होना और रोना इत्यादि का होना
2)(फटीग)थकान लगना
3)तनाव या डिप्रेशन का होना।

4)नींद में समस्या आना

5)कभी कभी याद दास्त मैं कमी आ जाती है।

सावधानियाँ और समाधान

1)चाय कॉफी और तीखा,तला भोजन का सेवन कम करें।

2)दूध, पनीर आदि डेरी प्रोडक्ट का उपयुक्त सेवन करे।जिससे शरीर को आवश्यक फाईटो-न्यूट्रिएंट्स मिलता रहे, हो सके तो डॉक्टर की सलाह से कैल्शियम सप्पलीमेंट ले, जिससे हड्डियाँ मजबूत होती है, और ओस्टीयोपोरोसिस हो ने से बचा जा सकता है।


3)इस दौरान अपने जीवन में एक्सरसाइज़ ,योग,मेडिटेशन, या एरोबिक्स किसी भी तरह के व्यायाम को जरूर शामिल करे जिससे हॉर्मोन्स बैलेंस होते है, और जिससे मेनोपॉज के दौरान होने वाली शारीरिक और मानसिक समस्या को काफी हद्द तक कम किया जाए सकता है।
4)खाने में हैल्थी और रेशेदार हरि सब्जियां,कच्चे सलाद,फ्रूट्स की मात्रा बढ़ाये।जिससे आवश्यक पोषक तत्व मिलता रहे।

5)पढ़ने, लिखने,संगीत,नृत्य, पेन्टिंगया किसी भी तरह की हॉबी को अपने जीवन में जरूर शामिल करें,जिससे तनाव,डिप्रेशन,से दूर रहा जा सके।

6)अच्छी क्वालिटी नींद जरूर लें।

अगर संशय ज्यादा हो और अति आवश्यक हो तो डॉक्टर कज सलाह से होर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी ले सकतेहै।
त्वचा और बाल की समस्या का सामना कैसे करें?
एस्ट्रोजन की कमी से त्वचा और बाल पतले हो जाते है और इस समस्या को जैसे आगे बताया उस अनुसार अच्छे न्यूट्रिशनल रिच फूड जिसमे विटामिन सी,विटामिन ए,ओमेगा-3 फेट्टी एसिड,बायोटिन से भरपूर आहार लें ।

त्वचा की अच्छी देखभाल करें -जैसे इस वक्त अत्यधिक ड्राईनेस से बचने के लिए मॉइस्चराइज़िंग फेस वॉश का इस्तेमाल करें,हायड्रेटिंग मॉइस्चराइजर,सन स्क्रीन,अच्छा नाईट क्रीम का उपयोग जरूर करें।
ज्यादा सुगंध वाले लोशन,परफ्यूम से दूर रहे क्योकि इस वक्त हमारी त्वचा ज्यादा सेंसिटिव हो जाती है।और ऐसे स्ट्रोंग सुगंधी लोशन्स और परफ्यूम से एलर्जी हो सकती है।
अच्छी क्वालिटी के मेकअप प्रोडक्टस यूज़ करे।

अच्छी स्किन केअर रुटीन फॉलो करें।

Leave a Comment

Your email address will not be published.